Kitne Ekaki Pyar Kar Tumhe

Beautiful Angel

हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

जिस पल हल्दी माँ ने लेपी होगी तन पर

जिस पल सखियों ने सौपी होंगी सौगाते

ढोलक की थापो में घुंघरू  की रुंझुन में

घुलकर फैली होंगी प्यारी बातें

उस पल मीठी सी धुन सूने कमरे में सुन

रोये मन चौसर पर हार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

कल तक जो हमको तुमको मिलवा देती थी

उन सखियों के प्रशनों ने टोका तो होगा

साजन की अंजुरी पर अंजुरी काँपी होगी

मेरी सुधियों ने रस्ता रोका तो होगा

उस पल सोचा मन में

आगे अब जीवन में

जी लेंगे हैस कर बिसार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

कल तक जिन गीतों को तुम अपना कहती थी

अखबारों मे पढ़कर कैसा लगता होगा

सावन की रातों मे साजन की बाहों में

तन तो सोता होगा पर मन जागता होगा

उस पल के जीने में आँसू पी लेने  में

मरते है मन ही मन मार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें

कितने एकाकी प्यार कर तुम्हें

Dr Kumar Vishwas

Search Terms:

Related posts:

Share Your Comment...